प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में संगठन के 20 वर्षों के सफर को ऐतिहासिक पड़ाव बताते हुए अगले दो दशकों के लिए महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने ब्रिक्स की संस्थागत निरंतरता मजबूत करने, वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और ग्लोबल साउथ की निर्णय प्रक्रिया में भूमिका बढ़ाने के लिए पांच प्रमुख प्रस्ताव रखे।
नई दिल्ली में BRICS सिखर सम्मेलन में Inclusive Global Governance and Strengthening सेशन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता ‘पीपुल सेंट्रिक’ और ‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ दृष्टिकोण पर आधारित रही है। लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता को प्राथमिकता देते हुए भारत ने साढ़े 350 से अधिक बैठकें आयोजित कीं और करीब 30 शहरों में ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत किया।
ब्रिक्स के लिए मोदी के पांच प्रमुख प्रस्ताव
1. ब्रिक्स कंटिन्यूटी एंड इम्प्लीमेंटेशन मैकेनिज्म : मोदी ने कहा कि हर वर्ष बदलने वाली अध्यक्षता के बावजूद संगठन की संस्थागत गति नहीं रुकनी चाहिए। उन्होंने ट्रोइका के माध्यम से पहलों और निर्णयों की निरंतर निगरानी का प्रस्ताव दिया।
2. सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी : इसमें प्रत्येक निर्णय के नोडल प्वाइंट, समय-सीमा और क्रियान्वयन की स्थिति दर्ज करने का सुझाव दिया गया, ताकि फैसलों के अनुपालन पर प्रभावी नजर रखी जा सके।
3. ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप : प्रधानमंत्री ने वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार कर अगली ब्रिक्स बैठक तक उन्हें रोडमैप का रूप देने का प्रस्ताव रखा। इसका आधार प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम निर्माण होगा।
4. सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क : वैश्विक व्यापार में अहम भूमिका निभाने वाले नाविकों के लिए आपात सहायता नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव दिया गया। इससे संकट संकेत, चिकित्सा सहायता, परिवारों को सूचना और निकासी में सहयोग मिल सकेगा।
5. ग्लोबल साउथ के लिए क्षमता निर्माण : मोदी ने युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं को वार्ता कौशल, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कानूनी विशेषज्ञता उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा, ताकि ग्लोबल साउथ को ‘रूल-टेकर’ से ‘रूल-शेपर’ बनाया जा सके।
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ब्रिक्स की निरंतरता के लिए नया तंत्र
मोदी ने कहा कि बदलती वार्षिक अध्यक्षता के कारण ब्रिक्स का संस्थागत कामकाज प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने ब्रिक्स कंटिन्यूटी एंड इम्प्लीमेंटेशन मैकेनिज्म बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके तहत ट्रोइका के माध्यम से विभिन्न पहलों और फैसलों की प्रगति की निगरानी की जा सकेगी। सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी में निर्णयों, नोडल प्वाइंट, समय-सीमा और क्रियान्वयन की स्थिति दर्ज करने का भी सुझाव दिया।
वैश्विक शासन की ‘पिरामिड व्यवस्था’ बदलने की जरूरत
प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था में शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता कुछ देशों के हाथों में केंद्रित है, जबकि ग्लोबल साउथ संकटों की अग्रिम पंक्ति में होने के बावजूद निर्णय प्रक्रिया में पीछे है। उन्होंने इस ‘पिरामिड ऑफ प्रिविलेज’ को ‘प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप’ में बदलने का आह्वान किया और अगली बैठक तक ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप तैयार करने के लिए वैश्विक शासन सुधार के 10 प्रस्ताव बनाने का सुझाव दिया।
प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम निर्माण पर जोर
मोदी ने सुधार के लिए प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम निर्माण को तीन प्रमुख आधार बताया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को और न टालने की बात कही। साथ ही वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में मतदान शक्ति और नेतृत्व की भूमिका को मौजूदा आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने पर जोर दिया।
ग्लोबल साउथ को ‘रूल-टेकर’ नहीं, ‘रूल-शेपर’ बनाने की बात
प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई, साइबर स्पेस, अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के भविष्य के नियम तय करने में सभी की समान भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने ग्लोबल साउथ के युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं को बातचीत कौशल, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कानूनी विशेषज्ञता उपलब्ध कराने की पहल का प्रस्ताव रखा। साथ ही वैश्विक व्यापार में अहम भूमिका निभाने वाले नाविकों के लिए सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क बनाने का सुझाव दिया।
मोदी ने कहा कि यदि भविष्य साझा है तो उसके निर्माण का अधिकार भी साझा होना चाहिए। उन्होंने ब्रिक्स के लिए “फ्रॉम वॉयस टू इम्पैक्ट, फ्रॉम प्रिविलेज टू पार्टनरशिप” का संकल्प दोहराया।