मोदी ने पुतिन को भेंट किया दो हज़ार साल पुरानी पुस्तक का रूसी अनुवाद

मोदी ने पुतिन को भेंट किया दो हज़ार साल पुरानी पुस्तक का रूसी अनुवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को महान तमिल संत, कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध रचना ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया।

दिल्ली में शुक्रवार 11 सितंबर 2026 भेंट किया गया यह उपहार भारत की समृद्ध तमिल साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों की भी झलक प्रस्तुत करता है।

मानव जीवन और नैतिकता का मार्गदर्शक ग्रंथ

तिरुवल्लुवर द्वारा रचित तिरुक्कुरल तमिल भाषा की महानतम शास्त्रीय कृतियों में शामिल है। इस ग्रंथ में मानव जीवन, नैतिकता, व्यवहार, सदाचार और रोजमर्रा के जीवन से जुड़े अनेक पहलुओं पर संक्षिप्त लेकिन गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं। इसकी शिक्षाएं समय और भौगोलिक सीमाओं से परे मानव समाज के लिए प्रासंगिक मानी जाती हैं।

‘तिरुक्कुरल’ कितनी पुरानी रचना है?

तिरुक्कुरल की रचना-तिथि को लेकर विद्वानों में मतभेद है और इसकी कोई एक सर्वसम्मत निश्चित तारीख उपलब्ध नहीं है। सामान्यतः इसे लगभग 2,000 वर्ष पुरानी रचना माना जाता है।

अनेक विद्वान तिरुवल्लुवर का समय ईसा पूर्व अंतिम शताब्दियों से लेकर ईस्वी की शुरुआती शताब्दियों के बीच मानते हैं। इसलिए तिरुक्कुरल को प्राचीन तमिल साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है।

133 अध्यायों में 1,330 कुरल

तिरुक्कुरल में कुल 133 अध्याय और 1,330 दोहेनुमा द्विपदियां, जिन्हें ‘कुरल’ कहा जाता है, शामिल हैं। प्रत्येक अध्याय में 10 कुरल हैं। ग्रंथ को मुख्य रूप से सदाचार, सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन और प्रेम जैसे व्यापक विषयों में विभाजित किया गया है।

शासन से लेकर प्रेम तक जीवन का दर्शन

तिरुक्कुरल में व्यक्ति के चरित्र, सत्य, संयम, शिक्षा, मित्रता और अतिथि-सत्कार के साथ शासन, प्रशासन और सामाजिक जीवन पर भी विचार मिलते हैं। इसके अलावा प्रेम और मानवीय भावनाओं का भी काव्यात्मक चित्रण किया गया है। संक्षिप्त दोहों में व्यापक जीवन-दर्शन प्रस्तुत करने के कारण तिरुक्कुरल को सार्वभौमिक नैतिक और साहित्यिक धरोहर के रूप में देखा जाता है।