ब्राज़ील की टूना में परजीवी! भारतीय टूना मछली सुरक्षित, खा सकते हैं

ब्राज़ील की टूना में परजीवी! भारतीय टूना मछली सुरक्षित, खा सकते हैं
हाइलाइट्स :
• ICAR-CMFRI ने दी सफाई
• भारतीय तट पर जांची गई मछलियां
• हानिकारक परजीवी संक्रमण के लक्षण नहीं
• ब्राजील के पास टूना में परजीवी मिलने की खबर
• मछली की अच्छी तरह करें सफाई
• अच्छी तरह पकाने से जोखिम कम

भारतीय तट पर पकड़ी गई मछलियों में परजीवी मिलने की खबरों को लेकर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद- केंद्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान ICAR-CMFRI ने स्पष्ट किया है कि किसी खास भौगोलिक क्षेत्र की मछलियों में परजीवी पाए जाने के आधार पर टूना या बाजार में उपलब्ध अन्य मछलियों का सेवन बंद करने की जरूरत नहीं है।

संस्थान के अनुसार, भारतीय तट पर जांची गई टूना समेत मछलियों में हानिकारक परजीवी संक्रमण के बाहरी लक्षण नहीं पाए गए हैं। ICAR-CMFRI ने कहा कि किसी एक क्षेत्र में मिली जानकारी को दूसरे भौगोलिक क्षेत्र में पाई जाने वाली उसी प्रजाति की मछलियों पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।

यह सलाह ब्राजील के पास अटलांटिक महासागर में स्किपजैक टूना में परजीवी पाए जाने संबंधी एक अध्ययन की खबरों के बाद जारी की गई है। संस्थान ने बताया कि अलग-अलग मछलियों और भौगोलिक क्षेत्रों में परजीवियों की मौजूदगी और संख्या अलग हो सकती है। यह पारिस्थितिक परिस्थितियों और कोपपोड्स जैसे मध्यवर्ती या द्वितीयक होस्ट की उपलब्धता पर भी निर्भर करती है।

ICAR-CMFRI के निदेशक डॉ. ग्रिन्सन जॉर्ज ने बताया कि संस्थान के वैज्ञानिक नियमित रूप से स्किपजैक टूना जैसी मछलियों की जैविक जांच करते हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा जांची गई मछलियों में हानिकारक परजीवी संक्रमण के बाहरी लक्षण नहीं मिले।

संस्थान ने उपभोक्ताओं को मछली तैयार करते समय आंत और अन्य अंदरूनी अंगों को ठीक से निकालने तथा मछली को अच्छी तरह पकाने की सलाह दी है। उसके मुताबिक, पर्याप्त तापमान पर पकाने से परजीवी मर जाते हैं और खाद्य सुरक्षा से जुड़े जोखिम कम होते हैं। कच्चे या अधपके समुद्री भोजन के सेवन में जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।