एक्सपायर्ड खाद्य उत्पादों की बिक्री का आरोप, महाराष्ट्र में रिलायंस-ब्लिंकइट समेत 10 लोगों पर केस

एक्सपायर्ड खाद्य उत्पादों की बिक्री का आरोप, महाराष्ट्र में रिलायंस-ब्लिंकइट समेत 10 लोगों पर केस
हाइलाइट्स
• ₹48 लाख के एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद जब्त
• रिलायंस, ब्लिंकइट समेत 10 पर FIR
• पांच प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने एक्सपायर हो चुके खाद्य उत्पादों की कथित बिक्री के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ठाणे और पुणे जिलों में 14 और 15 अक्टूबर को चलाए गए अभियान के दौरान कुल 48,09,924 रुपये के खाद्य उत्पाद जब्त किए गए। इस मामले में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, रिलायंस रिटेल, ब्लिंकइट और जोमैटो हाइपरप्योर से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों समेत 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। शुरुआती जांच में आरोप सामने आया है कि एक्सपायर हो चुके, खराब और ग्राहकों द्वारा लौटाए गए खाद्य उत्पादों को नष्ट करने के बजाय कथित तौर पर छांटकर दोबारा बिक्री के लिए भेजा जा रहा था।

ठाणे के शांति नगर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज

इस मामले में ठाणे के शांति नगर पुलिस स्टेशन में 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इनमें रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, रिलायंस रिटेल, ब्लिंकइट और जोमैटो हाइपरप्योर से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी, डिस्पोजल एजेंसी संचालक और स्थानीय सप्लायर शामिल हैं।

FIR खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई है।

नामजद लोगों में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के होल-टाइम डायरेक्टर वी. सुब्रमण्यम और अशोक कुमार सिंह शामिल हैं। रिलायंस रिटेल लिमिटेड के नॉमिनी विजय भिकाजी खर्माले और वेयरहाउस मैनेजर नीलेश रामदासराव देशमुख का नाम भी FIR में है।

इसके अलावा ब्लिंकइट कॉमर्स के डायरेक्टर अर्बिंदर सिंह ढींसा और दीपक सिंह, जोमैटो हाइपरप्योर के आबिद शेख, 'बी के डिस्पोज' के बाबर मियां अहमद सिद्दीकी, सप्लायर गुलजार अब्दुल खान, भिवंडी के चविंद्र और भिवंडी के 'डिस्काउंट स्टोर' से जुड़े अब्दुल मोबिन खान के नाम भी शामिल हैं।

ठाणे और पुणे में कहां-कहां जब्त हुआ सामान?

FDA सूत्रों के मुताबिक, 14 और 15 अक्टूबर को ठाणे और पुणे जिलों में कई स्थानों पर एक साथ निरीक्षण किया गया। इस दौरान अलग-अलग गोदामों और डिस्पोजल यार्ड से खाद्य उत्पाद जब्त किए गए।

जब्त सामान में भिवंडी के एक डिस्पोजल यार्ड से 24 लाख रुपये से अधिक मूल्य के उत्पाद शामिल थे। वाडपे स्थित रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के गोदाम से लगभग 4.92 लाख रुपये और उसताने स्थित जोमैटो हाइपरप्योर की सुविधा से करीब 7.81 लाख रुपये का सामान जब्त किया गया।

FDA के मुताबिक, सभी स्थानों से जब्त किए गए उत्पादों की कुल कीमत 48,09,924 रुपये थी।

जांच में एक्सपायर्ड और लौटाए गए उत्पादों को लेकर क्या सामने आया?

एक सूत्र ने PTI को बताया कि FDA की शुरुआती जांच में पता चला कि एक्सपायर हो चुके, खराब और ग्राहकों द्वारा लौटाए गए खाद्य उत्पादों को नष्ट किया जाना था। आरोप है कि इसके बजाय इन्हें डिस्पोजल एजेंसियों, बिना लाइसेंस वाले सॉर्टिंग यार्ड और बिचौलियों के जरिए रिटेलरों तक पहुंचाया जा रहा था, ताकि इन्हें ग्राहकों को बेचा जा सके।

जांच में डिस्पोजल एजेंसियों के दस्तावेजों को लेकर भी सवाल सामने आए। आरोप है कि कुछ एजेंसियों ने यह सुनिश्चित किए बिना प्रमाणपत्र और दस्तावेज जारी कर दिए कि उत्पाद वास्तव में नष्ट किए गए हैं या नहीं। इन दस्तावेजों में सामान को नष्ट किए जाने का दावा किया गया था।

FDA अधिकारियों को डिस्पोजल रिकॉर्ड में भी गड़बड़ियां मिलीं। इनमें उत्पादों की मात्रा में अंतर और सामान भेजने वाले तथा प्राप्त करने वाले पक्षों के विवरण में विसंगतियां शामिल थीं।

भिवंडी के यार्ड और रिटेल आउटलेट पर भी कार्रवाई

सूत्र के अनुसार, उत्पादों को भिवंडी के एक बिना लाइसेंस वाले यार्ड में छांटा जाता था। वहां से बिक्री योग्य दिखाई देने वाले पैकेट अलग करके कथित तौर पर दलालों और सप्लायरों को बेच दिए जाते थे।

इसके बाद भिवंडी के गुलजार नगर स्थित एक रिटेल आउटलेट पर भी एक्सपायर हो चुके और लीक हो रहे उत्पाद बिक्री के लिए रखे मिले। बताया गया कि यह आउटलेट बिना लाइसेंस और खरीद बिल के चल रहा था।

FDA ने बनाई थीं सात टीमें, पांच प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड

ठाणे और पुणे जिलों में संयुक्त निरीक्षण के लिए FDA ने सात टीमें बनाई थीं। इनमें असिस्टेंट कमिश्नर और फूड सेफ्टी ऑफिसर शामिल थे।

टीमों ने खाद्य उत्पादों की सूची तैयार की, सामान जब्त किया, सैंपल लिए और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। अधिकारियों ने यह निर्देश भी दिया कि जब्त उत्पादों को दूसरी जगह न ले जाया जाए, न बेचा जाए और न ही नष्ट किया जाए।

एक अधिकारी के मुताबिक, 15 अक्टूबर को हुई सुनवाई के बाद पांच प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए। इसके अलावा बिना लाइसेंस वाली चार जगहों पर कामकाज रोक दिया गया।

मामले में FIR दर्ज होने के बाद अब कार्रवाई का केंद्र एक्सपायर्ड और खराब खाद्य उत्पादों की कथित दोबारा बिक्री तथा डिस्पोजल रिकॉर्ड में मिली गड़बड़ियां हैं।