‘नाराज फूफा’—पिछले कुछ दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों में आया यह शब्द अब राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया है। 5 सितंबर 2026 को दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में PM मोदी ने पहली बार इसका इस्तेमाल किया और 8 सितंबर 2026 को गुजरात के वडोदरा में इसे फिर दोहराया। इसके साथ ही ‘झूठ की गूंज’, GenZ और BJP-कांग्रेस की रणनीति भी इस बहस के केंद्र में आ गई।
यह सिलसिला लाल किले से ‘दिमागी नक्सल’ की होम्योपैथिक गोली देने के 21 दिन बाद शुरू हुआ। अब सवाल यह है कि ‘नाराज फूफा’ महज एक राजनीतिक तंज है या युवाओं तक पहुंच बनाने की रणनीति का हिस्सा?
SRCC से वडोदरा तक कैसे पहुंचा ‘नाराज फूफा’?
5 सितंबर को PM मोदी SRCC के शताब्दी समारोह में पहुंचे थे। 2013 के बाद यह उनका पहला SRCC दौरा था। टीचर्स डे के मौके पर छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने समाज की ताकत को राष्ट्र की ताकत में बदलने वालों और हर काम का विरोध करने वालों के बीच फर्क बताया।
इसी संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘आपको जीवन में दो तरह के लोग मिलेंगे. एक वो जो समाज की ताकत को राष्ट्र की ताकत में बदलते हैं. दूसरे वो जो कोई भी काम शुरू होने पर 'नाराज फूफा' बन जाते हैं और हर चीज का विरोध करते हैं.’
इसी कार्यक्रम में PM मोदी ने कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को ‘झूठ की गूंज’ करार दिया।
तीन दिन बाद 8 सितंबर को वडोदरा की महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी (MSU) में ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम के दौरान फिर यही शब्द सुनाई दिया। वहां PM के मंच के साथ ‘Y’ आकार का रैंप बनाया गया था और उसके चारों ओर युवा बैठे थे।
PM मोदी ने JNPT (मुंबई) से वडोदरा तक चलाई गई डबल-स्टैक कंटेनर मालगाड़ी का जिक्र करते हुए कहा, ‘हाल ही में JNPT (मुंबई) से वडोदरा तक डबल-स्टैक कंटेनर मालगाड़ी चलाई गई. एक बार में 250 से ज्यादा ट्रकों के बराबर सामान मुंबई से वडोदरा पहुंच गया. अब ये नाराज फूफा जी चिल्लाएंगे कि ट्रक ड्राइवरों का क्या होगा? ट्रक कहां जाएंगे? जिन्होंने ट्रक खरीदे हैं उनका क्या होगा?’ खैर, फूफा को चिल्लाने का काम मिल गया.’
‘झूठ की गूंज’ कैसे बनी BJP का मुद्दा?
‘नाराज फूफा’ के साथ जिस दूसरे शब्द की चर्चा हुई, वह है ‘झूठ की गूंज’। अगस्त 2026 में एक GenZ क्रिएटर ने इसी नाम से वेबसाइट लॉन्च की थी।
इस वेबसाइट का इस्तेमाल राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान में किए गए दावों की फैक्ट-चेकिंग के लिए किया गया। वेबसाइट के मुताबिक, राहुल गांधी के चार अलग-अलग कार्यक्रमों में दिए गए 40 बयानों की जांच की गई। इनमें 29 को ‘फर्जी’ और 11 को ‘भ्रामक’ पाया गया। वेबसाइट ने 134 सोर्स इस्तेमाल करने की बात कही।
BJP ने इस वेबसाइट को विपक्ष के खिलाफ इस्तेमाल किया। PM मोदी ने भी SRCC और वडोदरा के कार्यक्रमों में ‘झूठ की गूंज’ का जिक्र किया। इस तरह यह शब्द राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा बन गया।
पुराने शब्दों से कितना अलग है ‘नाराज फूफा’?
PM मोदी के भाषणों में विपक्ष के लिए पहले भी ‘अर्बन नक्सल’, ‘खान मार्केट गैंग’, ‘आंदोलनजीवी’ और ‘परजीवी’ जैसे शब्द सामने आ चुके हैं। ‘नाराज फूफा’ इसी क्रम में नया शब्द है।
लेकिन इसकी भाषा अलग है। इस बार ऐसा शब्द इस्तेमाल किया गया है जिसे GenZ की भाषा से जोड़कर देखा जा रहा है। ‘फूफा’ के जरिए ऐसे रिश्तेदार की छवि सामने रखी गई है जो बड़ा, थोड़ा चिड़चिड़ा और हर बात में टांग अड़ाने वाला हो।
SRCC में PM मोदी ने ‘OG’, ‘Flex’ और ‘Dhurandhar’ जैसे GenZ स्लैंग का इस्तेमाल भी किया। वहीं वडोदरा में उनके आगमन पर ‘Dhurandhar’ फिल्म का हिट गाना ‘आरी आरी’ बजाया गया।
इससे BJP की GenZ तक पहुंच बनाने की कोशिश में भाषा, म्यूजिक और कार्यक्रम के फॉर्मेट का इस्तेमाल दिखाई देता है।
कांग्रेस ने ‘नाराज फूफा’ पर कैसे दिया जवाब?
PM मोदी के बयान पर कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी। 6 सितंबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया X पर कहा, ‘मोदी जी कल SRCC गए. यह देश के युवाओं, शिक्षा और उनके भविष्य पर संवाद का अवसर था. लेकिन अफसोस, युवाओं के सवालों का सामना करने के बजाय भाषण फिर एक राजनीतिक प्रचार में बदल गया.’
खरगे ने आगे कहा, ‘नाराज फूफा, दिमागी नक्सल, अर्बन नक्सल, खान मार्केट गैंग, आंदोलनजीवी, परजीवी नाम बदलते रहते हैं, लेकिन मोदी सरकार की जन-विरोधी नीतियां नहीं बदलतीं.’
कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने भी PM मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘12 साल प्रधानमंत्री रहने के बाद, SRCC जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में देश के युवाओं के लिए उनके पास कोई विजन नहीं, कोई प्रेरणादायक संदेश नहीं और कुछ भी सकारात्मक नहीं. बस विपक्ष को नाम देने का सहारा प्रधानमंत्री की विफलता है.’
खरगे ने एक और टिप्पणी करते हुए कहा, ‘आउटरीच की जरूरत तभी होती है जब आप आउट ऑफ रीच हो जाते हैं.’
GenZ क्यों बन गया BJP और कांग्रेस के लिए अहम?
इस बहस को समझने के लिए 20 जुलाई 2026 का जंतर-मंतर आंदोलन भी सामने आता है। NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा सुधारों को लेकर बड़ी संख्या में युवाओं ने प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने किया।
इस आंदोलन के बाद सत्ता और विपक्ष दोनों के सामने यह बात आई कि GenZ सिर्फ एक ‘इलेक्टोरल स्टैटिस्टिक’ नहीं रहा। वे अपनी आवाज उठा रहे हैं और उनकी आवाज का असर है।
इसके बाद BJP ने ‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ कार्यक्रम शुरू किया। इसके तहत हर दिन एक केंद्रीय मंत्री किसी यूनिवर्सिटी में जाकर छात्रों से बातचीत करेगा। यह कार्यक्रम NEET पेपर लीक विवाद और जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद तैयार किया गया।
दूसरी ओर कांग्रेस ने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को 800 शहरों तक ले जाने का फैसला किया। जून 2026 में कोटा से शुरू हुआ यह अभियान देहरादून, प्रयागराज और पुणे तक पहुंचा। इसमें परीक्षा में गड़बड़ी, पेपर लीक, बढ़ती शिक्षा लागत, भर्ती की समस्याएं और बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठाए गए।
क्या ‘नाराज फूफा’ आगे भी बड़ा राजनीतिक नैरेटिव बनेगा?
BJP ने ‘नाराज फूफा’ और ‘झूठ की गूंज’ के जरिए विपक्ष की ऐसी छवि पेश की है जिसमें उसे हर अच्छे काम का विरोध करने वाला, नकारात्मक सोच वाला और झूठ फैलाने वाला बताया गया है। इसके पीछे GenZ युवाओं को यह बताने की रणनीति बताई गई है कि विपक्ष उन्हें गुमराह कर रहा है।
वहीं खरगे ने सवाल उठाया, ‘लोकतंत्र में विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना है. अगर हर सवाल को झूठ की गूंज या नाराज फूफा कहकर खारिज कर दिया जाए, तो फिर विपक्ष की भूमिका क्या रह जाती है?’
विशेषज्ञों के मुताबिक, आगे इसके तीन संभावित नतीजे हो सकते हैं। ‘नाराज फूफा’ BJP के भाषणों का स्थायी हिस्सा बन सकता है और BJP इसे GenZ के बीच लोकप्रिय बनाने की कोशिश कर सकती है।
दूसरी संभावना यह है कि विपक्ष खुद इस शब्द को पलटवार के लिए इस्तेमाल करे। खरगे पहले ही इसे ‘नाकामियां छिपाने’ की कोशिश बता चुके हैं।
तीसरी और अहम बात GenZ वोटरों से जुड़ी है। आखिर वे ‘नाराज फूफा’ वाले विपक्ष की, ‘सच की हुंकार’ वाली सरकार की या किसी तीसरी ताकत की बात मानेंगे—यह सवाल इस पूरी नैरेटिव जंग का अहम हिस्सा बन गया है।