हिना बलोच के दावे से मचा विवाद : '80% पाकिस्तानी गे, बाकी सब बाइसेक्सुअल'

Authored By: News Corridors Desk | 04 Apr 2026, 02:20 PM
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पाकिस्तान में LGBTQ मुद्दों को लेकर हाल ही में एक नई बहस शुरू हुई है। इसकी वजह बनी ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट हिना बलोच का एक बयान, जिसमें उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की लगभग 80% आबादी गे (समलैंगिक) और 20% बाइसेक्शुअल है। उन्होंने इसे “ओपन सीक्रेट” बताया, यानी ऐसी बात जिसे लोग जानते तो हैं, लेकिन खुलकर स्वीकार नहीं करते।

हालांकि, इस दावे को लेकर कोई आधिकारिक या वैज्ञानिक आंकड़े मौजूद नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रतिशत का कोई प्रमाण नहीं है और इसे एक व्यक्तिगत राय या अनुभव के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि तथ्य के रूप में। फिर भी, इस बयान ने समाज में छिपी यौन पहचान और उस पर होने वाले दबाव को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है। हिना बलोच का कहना है कि पाकिस्तान में लोग अपनी असली यौन पहचान को खुलकर नहीं बता पाते। इसके पीछे सामाजिक, धार्मिक और पारिवारिक दबाव बड़ी वजह है। समाज में “स्ट्रेट” यानी विषमलैंगिक होना ही सामान्य माना जाता है, इसलिए कई लोग अपनी असली पहचान छिपाकर उसी के अनुसार जीवन जीते हैं। इस कारण LGBTQ समुदाय के कई लोग दोहरी जिंदगी जीने को मजबूर हो जाते हैं।

कानूनी रूप से भी पाकिस्तान में स्थिति काफी सख्त है। समलैंगिक संबंध (gay sex) वहां गैरकानूनी माने जाते हैं। इसके लिए जेल की सजा हो सकती है। कुछ मामलों में शरिया कानून के तहत और भी कठोर दंड का प्रावधान है। ऐसे माहौल में लोगों का अपनी पहचान छिपाना स्वाभाविक हो जाता है। सामाजिक स्तर पर भी LGBTQ समुदाय को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्हें अक्सर भेदभाव, हिंसा, तिरस्कार और उत्पीड़न झेलना पड़ता है। परिवार और समाज से समर्थन न मिलने के कारण उनकी स्थिति और कठिन हो जाती है। कई लोग अपनी सुरक्षा के लिए अपनी पहचान को गुप्त रखते हैं।

हालांकि, ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए कुछ कानूनी प्रगति भी हुई है। साल 2009 में पाकिस्तान का सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रांसजेंडर लोगों को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता दी थी। इसके बाद उन्हें पहचान पत्र और कुछ अधिकार मिलने शुरू हुए। लेकिन जमीनी हकीकत में आज भी उन्हें भेदभाव और शोषण का सामना करना पड़ता है। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि LGBTQ समुदाय कोई एक जैसा समूह नहीं है, बल्कि इसमें अलग-अलग पहचान और अनुभव वाले लोग शामिल होते हैं। हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है और पूरे देश की आबादी के बारे में एक ही तरह का दावा करना सही नहीं माना जाता।

हिना बलोच के बयान ने भले ही विवाद पैदा किया हो, लेकिन इसने एक अहम मुद्दे को सामने लाने का काम किया है समाज में छिपी हुई यौन पहचान और उस पर होने वाला दबाव। यह चर्चा इस बात की ओर इशारा करती है कि कई लोग अपनी असली पहचान को व्यक्त नहीं कर पाते और उन्हें स्वीकार्यता की जरूरत है।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि पाकिस्तान में LGBTQ समुदाय की स्थिति जटिल है। जहां एक ओर कुछ कानूनी पहचान मिली है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक और कानूनी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। ऐसे में किसी भी दावे को तथ्य मानने से पहले उसकी जांच जरूरी है, लेकिन इस मुद्दे पर खुलकर और संवेदनशील तरीके से चर्चा होना भी उतना ही जरूरी है।