चंपत राय ने कहा, चढ़ावा मामले में कोई भूमिका नहीं

चंपत राय ने कहा, चढ़ावा मामले में कोई भूमिका नहीं

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा की  कथित चोरी मामले में ट्रस्ट में महत्वपूर्ण भूमिका रखने वाले चंपत राय ने ख़ुद को पाक-साफ क़रार दिया है और कहा है कि उनकी सक्रियता से ही संदिग्ध पकड़े गए हैं।

श्री राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर बढ़ते विवाद के बाद ट्रस्ट के महासचिव पद से त्यागपत्र देने वाले चंपत राय से पुलिस ने पूछताछ की है जिसमें उन्होंने चढ़ावा चोरी में हाथ होने से साफ इनकार किया है। चंपत राय ने पुलिस को बताया है कि उनके संज्ञान में चोरी का मामला आते ही वह तुरंत सक्रिय हो गए थे। उनके ही कहने पर संदिग्ध पकड़े गए हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जिन 8 लोगों पर FIR हुई और अरेस्ट किया गया, वे सभी कहीं न कहीं चंपत राय से जुड़े हुए थे। ऐसे में चंपत राय से भी पुलिस ने करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। सवालों का जवाब देते हुए चंपत राय ने कहा कि राम मंदिर में तमाम फैसलों की जिम्मेदारी उनकी खुद की थी, लेकिन कई चीजें गलत हुई हैं। वह यह बात स्वीकार करते हैं।

इसका अंदेशा नहीं था

जब चंपत राय से आरोपी टिन्नू यादव को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि टिन्नू उनसे काफी समय से जुड़ा हुआ है। उन्हें कभी अंदेशा भी नहीं था कि टिन्नू कुछ ऐसा कर सकता है।

कुछ दिन पहले अनुकल्प मिश्रा की गिरफ्तारी हुई थी। इसी बात का जिक्र कर के चंपत राय ने बताया कि जब उन्हें जानकारी मिली थी, तभी उन्होंने पुलिस ने समन्वय करके शुरुआती जांच करवाई और अनुकल्प मिश्रा को अरेस्ट करवाया था।

CCTV का जिम्मा संभाल रहे अर्जुन देव का ट्रांसफर

अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच के बीच एक बड़ा प्रशासनिक कदम सामने आया है। पिछले 17 वर्षों से अयोध्या में तैनात वायरलेस विभाग के रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर (RMO) अर्जुन देव का तबादला कर उन्हें गोरखपुर भेज दिया गया है। खास बात यह है कि अर्जुन देव मंदिर के वायरलेस सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और दान गिनती कक्ष की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व संभाल रहे थे। ऐसे में यह तबादला कई सवाल भी खड़े कर रहा है।

वर्ष 2009 से अयोध्या में तैनात अर्जुन देव का कई बार स्थानांतरण हुआ, लेकिन हर बार उनका तबादला रुक जाता था। वह राम मंदिर परिसर के वायरलेस सिस्टम, सीसीटीवी कंट्रोल रूम और उस काउंटिंग रूम की निगरानी के प्रभारी थे, जहां श्रद्धालुओं के चढ़ावे की गिनती होती थी।

कैसे हुईं नियुक्तियां

चंपत राय से यह सवाल भी किया कि इन लोगों की नियुक्तियां किन आधार पर हुई थी? जवाब में चंपत राय ने बताया कि नियुक्तियों के कई पैमाने थे लेकिन वह अकेले इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं। तमाम लोगों की पैरवी के आधार पर इन्हें नौकरी दी गई थी।

विहित का कड़ा रुख़

विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि इस मामले पर वह चाहते हैं कि जितने लोग भी इस कृत्य में शामिल हैं उनपर कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज भी यही चाहता है।