सेशेल्स के राष्ट्रपति को पीतल का कछुआ तो फर्स्ट लेडी को बिदरीवेयर बॉक्स का गिफ्ट

सेशेल्स के राष्ट्रपति को पीतल का कछुआ तो फर्स्ट लेडी को बिदरीवेयर बॉक्स का गिफ्ट

राष्ट्रपति को मुरादाबादी पीतल का कछुआ

भारत की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मुरादाबादी पीतल की कछुआ प्रतिमा सेशेल्स के राष्ट्रपति को भेंट की गई। इसकी बारीक नक्काशी, आकर्षक चमक और कलात्मक डिजाइन पीढ़ियों से चली आ रही भारतीय शिल्पकला की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं।यह विशेष उपहार उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की विश्वप्रसिद्ध पीतल शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे भारत की "ब्रास सिटी" के नाम से जाना जाता है।

सेशेल्स की फर्स्ट लेडी को बिदरीवेयर बॉक्स

बिदरीवेयर बॉक्स भारत की मशहूर मेटलक्राफ्ट (धातु-शिल्प) परंपरा का एक शानदार उदाहरण है। यह अपनी खास बनावट के लिए जाना जाता है, जिसमें गहरे काले रंग की धातु की सतह पर चमकदार चांदी की नक्काशी का कंट्रास्ट (दिखता है। कुशल कारीगरों द्वारा हाथ से बनाए गए इस बॉक्स पर बारीक ज्यामितीय और फूलों के डिज़ाइन बने हैं, जिनमें महीन चांदी के तार जड़े गए हैं। यह बेहतरीन बारीकी और कलाकारी को दर्शाता है।

बिदरीवेयर की शुरुआत कर्नाटक के बीदर में हुई थी, और इसी जगह के नाम पर इसका नाम पड़ा है।

फर्स्ट लेडी को माहेश्वरी सिल्क स्टोल भी भेंट

अपनी बहु-उपयोगिता और नज़ाकत के लिए मशहूर माहेश्वरी स्टोल को सांस्कृतिक धरोहर और आज के ज़माने के फ़ैशन एक्सेसरी, दोनों ही रूपों में बहुत पसंद किया जाता है।इसे भी फर्स्ट लेडी को भेंट किया गया।

माहेश्वरी सिल्क स्टोल भारत की हथकरघा (हैंडलूम) विरासत का एक शानदार नमूना है। यह अपने हल्के टेक्सचर, बेहतरीन ड्रेप और खास बुने हुए पैटर्न के लिए मशहूर है। मध्य प्रदेश के माहेश्वर से शुरू हुई यह बुनाई कला अपनी बेहतरीन कारीगरी और सिल्क व कॉटन धागों के शानदार मेल के लिए जानी जाती है।

सेशेल्स के उपराष्ट्रपति को सिक्किम की ऑर्किड पेंटिंग

सिक्किम की यह शानदार ऑर्किड पेंटिंग राज्य की समृद्ध फूलों की विरासत और उसकी जीवंत कलात्मक परंपराओं का एक सुंदर संगम है। इस कलाकृति में भारत के राष्ट्रीय पक्षी, मोर को दिखाया गया है, जो बारीक फूलों वाली बेलों के बीच नाजुक ऑर्किड फूलों से खूबसूरती से सजा हुआ है। यह प्रकृति और कलात्मक अभिव्यक्ति के सामंजस्य का जश्न मनाती है।

भारत और सेशेल्स, दोनों से जुड़ाव के कारण इस कलाकृति का विशेष महत्व है। जहाँ मोर भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, वहीं ऑर्किड सेशेल्स का राष्ट्रीय फूल है।

सेकंड लेडी को कांचीपुरम सिल्क फ़ैब्रिक

इस फ़ैब्रिक में गहरे मैरून रंग के बेस पर सुंदर सुनहरी ज़री के डिज़ाइन बने हैं और साथ ही लाल, हरे और सुनहरे रंग का आकर्षक बॉर्डर भी है। इसकी शानदार बुनाई, बारीक डिटेलिंग और रंगों का बेहतरीन तालमेल कांचीपुरम की खास कलात्मक परंपराओं को दिखाता है।

कांचीपुरम सिल्क फ़ैब्रिक भारत की सबसे मशहूर हैंडलूम परंपराओं में से एक है। यह अपने शानदार टेक्सचर, चटख रंगों और बेहतरीन कारीगरी के लिए जाना जाता है। तमिलनाडु के ऐतिहासिक मंदिर शहर कांचीपुरम से शुरू हुआ यह शानदार कपड़ा बढ़िया मलबरी सिल्क से बुना जाता है।

स्पीकर के लिए टोडा एम्ब्रॉयडरी वाली शॉल

पारंपरिक रूप से समारोहों और अहम सामाजिक मौकों पर पहनी जाने वाली यह शॉल पहचान, निरंतरता और टोडा मूल निवासी ज्ञान को बचाए रखने का प्रतीक है।

टोडा एम्ब्रॉयडरी वाली शॉल, तमिलनाडु की नीलगिरि पहाड़ियों में रहने वाले मूल निवासी चरवाहा समुदाय, 'टोडा' की एक खास कपड़ा बनाने की परंपरा है। इसे सफ़ेद सूती कपड़े पर बनाया जाता है और इस पर लाल और काले रंग की आकर्षक ज्यामितीय (geometric) कढ़ाई की जाती है।कढ़ाई की इस तकनीक को 'पुखूर' (Pukhoor) कहा जाता है, जो सिर्फ़ टोडा लोगों में ही पाई जाती है और इसे पूरी तरह से हाथ से किया जाता है।