ACP Vivek Bhagat: जंतर-मंतर के दो प्रदर्शनों के बीच क्यों चर्चा में आया नाम? जानें कौन हैं विवेक भगत

ACP Vivek Bhagat: जंतर-मंतर के दो प्रदर्शनों के बीच क्यों चर्चा में आया नाम? जानें कौन हैं विवेक भगत

दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत का नाम कुछ महीनों के अंतराल में जंतर-मंतर पर हुए दो अलग-अलग प्रदर्शनों को लेकर चर्चा में आया है। जुलाई में प्रदर्शन के दौरान वह खुद घायल हुए थे। वहीं, अक्तूबर में हुए प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों की शिकायत में उनका नाम सामने आया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच विवेक भगत की पोस्टिंग, उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और दोनों प्रदर्शनों से जुड़ी घटनाएं चर्चा का विषय बनी हैं।

कौन हैं एसीपी विवेक भगत?

विवेक भगत दिल्ली पुलिस में एसीपी यानी सहायक पुलिस आयुक्त हैं। फिलहाल वह कनॉट प्लेस के उपमंडल पुलिस अधिकारी के तौर पर तैनात हैं। वह DANIPS कैडर से आते हैं।

विवेक भगत ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2017 पास की थी और 967वीं रैंक हासिल की थी। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि इंजीनियरिंग की है। उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई की। उनकी पढ़ाई 2012 से 2016 के बीच हुई।

अक्तूबर के प्रदर्शन में कैसे आया विवेक भगत का नाम?

3 अक्तूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन हुआ था। यह प्रदर्शन मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं के विरोध में किया गया था।

प्रदर्शन की कवरेज कर रहीं तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस कार्रवाई के दौरान बदसलूकी और मारपीट के आरोप लगाए। इनमें से एक महिला पत्रकार ने अपनी शिकायत में एसीपी विवेक भगत पर उन्हें अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया।

तीनों महिला पत्रकारों की शिकायतों को निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए अपराध शाखा को सौंप दिया गया है।

प्राथमिकी और CCTV फुटेज को लेकर प्रदर्शन

महिला पत्रकारों की शिकायतों से जुड़े मामले में 5 अक्तूबर को प्रदर्शनकारियों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन किया। उनकी मांग थी कि मामले में प्राथमिकी दर्ज की जाए और घटना के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि घटना वाले दिन ही उन्होंने पुलिस से सीसीटीवी फुटेज मांगी थी, लेकिन उन्हें 24 घंटे बाद आने के लिए कहा गया। उनका यह भी आरोप था कि दोबारा थाने पहुंचने के बाद भी फुटेज नहीं दी गई और प्राथमिकी दर्ज करने या जांच की स्थिति के बारे में उन्हें जानकारी नहीं दी गई।

इस प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया।

अतिरिक्त डीसीपी का चार्ज लेने से विवेक भगत ने क्यों किया अनुरोध?

इसी घटनाक्रम के बीच 5 अक्तूबर को दिल्ली सरकार ने चयन श्रेणी के 12 DANIPS अधिकारियों को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त के पद का वर्तमान कार्यभार देने का आदेश जारी किया। इनमें एसीपी विवेक भगत का नाम भी शामिल था।

इसके बाद विवेक भगत ने अनुरोध किया कि महिला पत्रकारों से जुड़े आरोपों की पूरी जांच होने और उसके संतोषजनक तरीके से पूरा होने तक वह यह अतिरिक्त जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते। उनके अनुरोध के बाद दिल्ली सरकार ने आदेश में बदलाव किया और बाकी 11 अधिकारियों के लिए वर्तमान कार्यभार देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।

दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया कि 12 अधिकारियों को वर्तमान कार्यभार देने का प्रस्ताव 25 अगस्त को शुरू हुआ था। यानी इसकी प्रक्रिया मौजूदा आरोप सामने आने से पहले शुरू हो चुकी थी और जरूरी मंजूरी मिलने के बाद 5 अक्तूबर को आदेश जारी किया गया था।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान कार्यभार देना नियमित पदोन्नति नहीं है। यह अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है। इससे कोई वित्तीय लाभ नहीं मिलता और जिन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी जाती है, वे नियमित पद पर तैनात अधिकारी के वैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

विवेक भगत से जुड़ा फर्जी पोस्टर भी आया सामने

मौजूदा मामले के बीच सोशल मीडिया पर एसीपी विवेक भगत से जुड़ा एक फर्जी पोस्टर भी सामने आया। इसमें उन्हें एक महिला पत्रकार के साथ कथित बदसलूकी करते हुए दिखाया गया था।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, यह पोस्टर एआई की मदद से तैयार किया गया था और कई सोशल मीडिया हैंडल्स पर शेयर किया गया। पुलिस ने इस मामले में नदीम नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।

जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि पोस्टर तैयार होने के बाद इसे किन-किन खातों से साझा किया गया और इसके पीछे कितने लोग जुड़े थे।

जुलाई में हुए प्रदर्शन के दौरान भी चर्चा में आए थे

विवेक भगत इससे पहले जुलाई में नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा में घायल होने के बाद चर्चा में आए थे।

उस समय वह कनॉट प्लेस के एसीपी थे और जंतर-मंतर वाले इलाके में ड्यूटी पर तैनात थे। उन्होंने बताया था कि दिन की ड्यूटी के बाद वह शाम की पाली में भी ड्यूटी कर रहे थे।

उनके मुताबिक, वह रीगल भवन से संसद मार्ग होते हुए टॉल्स्टॉय मार्ग और संसद मार्ग की लाल बत्ती की ओर जा रहे थे। उनके साथ पांच-छह पुलिसकर्मी, प्रशिक्षु एसीपी रोहित और परिचालक नवनीत समेत अन्य पुलिसकर्मी मौजूद थे।

भीड़ में फंसे पुलिसकर्मी को बचाने के दौरान घायल हुए थे

विवेक भगत के मुताबिक, उस दौरान पुलिसकर्मियों पर पानी की बोतलें फेंकी जा रही थीं। भीड़ पुलिस के खिलाफ नारे लगा रही थी और आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रही थी। इसी बीच एक पुलिसकर्मी भीड़ में फंस गया।

उन्होंने बताया था कि उस पुलिसकर्मी को काफी मारा-पीटा गया और उसके सिर से खून बहने लगा। उसे बचाने के लिए आगे बढ़ने पर भीड़ ने विवेक भगत को भी घेर लिया और उनके साथ मारपीट की।

उनके मुताबिक, भीड़ बेहद उग्र थी और पुलिसकर्मियों को अलग-थलग कर उन पर हमला किया गया।

इस घटना में उनके चेहरे पर चोट आई, हाथों में सूजन हुई और उनके दांत टूट गए। अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके दोनों हाथों, पैरों और कंधे पर कई चोटों के निशान थे और सिर के पीछे सूजन थी।