एक खुशियों भरी शाम… हंसी-ठिठोली से भरा सफर… और फिर अचानक सब कुछ खामोश। चीखें पानी में घुल गईं और कुछ ही पलों में जिंदगियां डूब गईं। बरगी डैम में हुआ ये क्रूज हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि दिल को चीर देने वाली त्रासदी बनकर सामने आया है। जहां मौत के साए में भी एक मां ने अपनी बेटी को आखिरी सांस तक सीने से लगाए रखा। इस हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं. अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि लगभग 28 लोगों का रेस्क्यू किया गया है और कुछ लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
यह हादसा उस वक्त हुआ जब करीब 40 पर्यटक शाम के समय डैम में क्रूज का आनंद ले रहे थे। मौसम बदल रहा था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में यह सफर मौत में बदल जाएगा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अचानक नाव में पानी घुसने लगा और हालात तेजी से बिगड़ गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सामने आए दृश्य ने हर किसी को झकझोर दिया। पानी के भीतर मलबे के बीच जब गोताखोर पहुंचे, तो उन्हें एक मां और उसकी बेटी के शव साथ मिले। मां ने अपनी बच्ची को इतनी मजबूती से पकड़ रखा था कि मौत के बाद भी दोनों को अलग करना मुश्किल हो गया। यह दृश्य उन लोगों के लिए भी असहनीय था, जो रोजाना ऐसे कठिन हालात का सामना करते हैं।
जांच में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। यात्रियों को लाइफ जैकेट नहीं पहनाई गई थी, बल्कि उन्हें अलग रख दिया गया था। जब स्थिति बिगड़ी, तब जल्दबाजी में जैकेट बांटने की कोशिश की गई, जिससे अफरा-तफरी मच गई। इसके अलावा, नाव में क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे और चालक के अनुभव पर भी सवाल उठ रहे हैं।
रेस्क्यू टीम को बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ा। पानी के अंदर दृश्यता लगभग शून्य थी, और उलटी पड़ी नाव लोहे के ढांचे की वजह से जाल जैसी बन गई थी। कई जगहों पर मलबा तोड़कर ही अंदर फंसे लोगों तक पहुंचना संभव हुआ।
यह हादसा कई बड़े सवाल खड़े करता है. क्या सुरक्षा नियमों का पालन केवल कागजों तक सीमित रह गया है? क्या पर्यटकों की जान से ज्यादा मुनाफे को प्राथमिकता दी जा रही है?
बरगी डैम की यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर चूक का संकेत है, जिसने एक खुशहाल शाम को मातम में बदल दिया।