बंगाल चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट में TMC की दलील, हटाए गए वोटरों ने बदले नतीजे?

Date: 2026-05-11
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पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बड़ा दावा किया। पार्टी ने अदालत से कहा कि राज्य की कई विधानसभा सीटों पर जीत और हार का अंतर उन मतदाताओं की संख्या से भी कम है, जिनकी अपीलें अभी अपीलेट ट्रिब्यूनल में लंबित हैं। टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कोर्ट में दलील दी कि 31 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी और टीएमसी उम्मीदवारों के बीच जीत का अंतर बेहद कम रहा, जबकि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। इन लोगों की अपीलें अभी तक ट्रिब्यूनल में लंबित हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि कुछ सीटों पर हटाए गए मतदाताओं की संख्या हार के अंतर से कहीं ज्यादा है। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक सीट पर टीएमसी उम्मीदवार केवल 863 वोटों से चुनाव हारा, जबकि वहां 5432 मतदाताओं की अपीलें अब भी लंबित हैं। इन मतदाताओं को चुनाव में वोट डालने की अनुमति नहीं दी गई थी। कल्याण बनर्जी ने यह भी कहा कि राज्यभर में करीब 35 लाख लोग मतदान नहीं कर सके क्योंकि उनके मामलों पर ट्रिब्यूनल में सुनवाई पूरी नहीं हुई थी। वहीं टीएमसी और बीजेपी के बीच कुल वोट अंतर लगभग 32 लाख बताया गया। सुनवाई के दौरान उन्होंने जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पिछली टिप्पणी का हवाला देते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना था कि यदि हटाए गए मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से अधिक है, तो मामले की न्यायिक जांच की जरूरत पड़ सकती है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने टीएमसी को विस्तृत जानकारी के साथ अंतरिम आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि पार्टी यह साबित करना चाहती है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने का असर चुनाव नतीजों पर पड़ा है, तो उसे इसके लिए उचित आवेदन देना होगा। टीएमसी की ओर से वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने भी कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अपीलेट ट्रिब्यूनल में लंबित मामलों के निपटारे में कई साल लग सकते हैं और तब तक कई चुनाव हो जाएंगे। वहीं चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील ने कहा कि किसी भी सीट के चुनाव परिणाम को हाईकोर्ट में चुनाव याचिका के जरिए चुनौती दी जा सकती है। इसके बाद टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने को चुनाव याचिका का आधार माना जाए। हालांकि इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत इस तरह का सीधा आदेश कैसे दे सकती है।

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