भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: कहां पूरा हुआ ट्रायल?

Date: 2026-04-30
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दिल्ली। रतीय रेलवे पर्यावरण-अनुकूल यात्रा की नई क्रांति लाने को तैयार है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की तैयारी लगभग मुकम्मल हो चुकी है। चेन्नई में निर्मित यह ट्रेन और इसका फ्यूल स्टेशन तैयार हैं, जबकि सेफ्टी जांच चल रही है। हाल ही में हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर पहला ट्रायल सफल रहा, जहां ट्रेन ने 85 किमी/घंटा की रफ्तार हासिल की।


ट्रायल डेटा के आधार पर तकनीकी कमियों का मूल्यांकन किया जा रहा है। आने वाले दिनों में अतिरिक्त परीक्षण होंगे, ताकि सभी सुरक्षा मानकों को पूरा कर रोजाना संचालन की अनुमति मिल सके। रेलवे सूत्रों के मुताबिक, यह ट्रेन 2026-27 में पैसेंजर्स को सेवा देना शुरू कर देगी।

जींद-सोनीपत रूट पर पहला ट्रायल: 85 किमी/घंटा की रफ्तार


ट्रायल के दौरान ट्रेन ने ब्रॉड गेज ट्रैक पर शानदार प्रदर्शन किया। यह परीक्षण रूट की दूरी तय करने में सफल रहा, जो हाइड्रोजन प्रणोली की विश्वसनीयता साबित करता है। अब फाइनल सर्टिफिकेशन के बाद व्यावसायिक रन शुरू होगा।

10 कोचों वाली दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन: क्षमता और स्पीड


यह ट्रेन 10 कोचों से लैस होगी, जिसमें 8 कोच यात्री उपयोग के लिए। प्रत्येक कोच में लगभग 100 सीटें होंगी, यानी कुल 800 यात्रियों की क्षमता। जींद-सोनीपत के बीच शुरू होने वाली यह सर्विस प्रदूषण मुक्त यात्रा का प्रतीक बनेगी। जर्मनी की पहली हाइड्रोजन ट्रेन महज 2 कोचों वाली थी, लेकिन भारत 10 कोचों वाली सबसे लंबी ट्रेन चला रहा है। अधिकतम स्पीड 105 किमी/घंटा और दैनिक 360 किलोमीटर का सफर - यह ट्रेन रेल यात्रा को नया आयाम देगी।

कोच कॉन्फिगरेशन और पैसेंजर कैपेसिटी


कुल कोच: 10 (8 पैसेंजर + 2 पावर कार)

प्रति कोच क्षमता: 100 यात्री

रूट: जींद-सोनीपत (हरियाणा)

हाइड्रोजन ट्रेन की अनोखी विशेषताएं: जीरो एमिशन और ग्रीन टेक्नोलॉजी


इस ट्रेन की सबसे बड़ी खूबी है शून्य कार्बन उत्सर्जन। धुएं के बिना दौड़ेगी, जो वायु प्रदूषण कम करने में मील का पत्थर साबित होगी। जींद में इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया से ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन प्लांट स्थापित किया गया है। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर बनी यह ट्रेन 2400 किलोवाट पावर जनरेट करेगी। दो ड्राइविंग पावर कारें (प्रत्येक 1200 किलोवाट) इसे शक्तिशाली बनाती हैं। फ्यूल स्टेशन भी तैयार है, जो हाइड्रोजन सप्लाई सुनिश्चित करेगा। इसकी पावर कैपेसिटी 2400 kW है, जिसमें दो 1200 kW ड्राइविंग कारें शामिल हैं। अधिकतम स्पीड 105 किमी/घंटा, दैनिक रेंज 360 किमी और ईंधन के रूप में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग होगा, जो इसे पूरी तरह जीरो कार्बन एमिशन वाला बनाता है।

भविष्य की संभावनाएं: रेलवे का ग्रीन मिशन


हाइड्रोजन ट्रेन से रेलवे का 'ग्रीन ट्रांसपोर्टेशन' लक्ष्य मजबूत होगा। यह न केवल प्रदूषण घटाएगा, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता भी बढ़ाएगा। आने वाले समय में अन्य रूट्स पर विस्तार की योजना है। यात्रियों को सस्ती, स्वच्छ और तेज यात्रा मिलेगी। रेलवे मंत्रालय ने पुष्टि की है कि सभी परीक्षणों के बाद लॉन्च होगा। यह कदम भारत को हाइड्रोजन मोबिलिटी में वैश्विक लीडर बना सकता है।

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