हाइलाइट्स :
• चुनाव आयोग विवाद पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते करेगा सुनवाई
• वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने आयोग के सामूहिक फैसलों का मुद्दा उठाया
• SIR के फैसले पर पूछा- निर्णय सर्वसम्मति या बहुमत से हुआ?
• चुनाव आयोग ने कहा- SIR के सभी फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए
Election Commission Row: चुनाव आयोग के कामकाज और फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के चुनाव आयोग की ओर से अकेले फैसले लेने के अधिकार पर सवाल उठाने वाली नई याचिका को सूचीबद्ध करने पर कोर्ट ने सहमति जताई है।
वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने इस मामले को मेंशन किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है और कानून के मुताबिक आयोग के फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर होने चाहिए।
CJI सूर्यकांत ने अगले हफ्ते सुनवाई के लिए कहा
विकास सिंह ने दलील दी कि चुनाव आयोग को बहु-सदस्यीय संस्था बनाने का उद्देश्य फैसलों को सामूहिक रूप से लेना था। उन्होंने SIR यानी Special Intensive Revision से जुड़े फैसले का भी मुद्दा उठाया।
उन्होंने सवाल किया कि क्या SIR को लेकर फैसला वास्तव में चुनाव आयोग ने सामूहिक रूप से लिया था। उनका कहना था कि अगर आयोग के स्तर पर सर्वसम्मति या बहुमत से निर्णय नहीं हुआ, तो यह गंभीर मुद्दा है, क्योंकि अदालत के सामने भी इसे चुनाव आयोग का फैसला बताया गया है।
इस पर CJI सूर्यकांत ने मामले को अगले हफ्ते सूचीबद्ध करने को कहा।
क्या है चुनाव आयोग के फैसले को लेकर विवाद?
यह विवाद एक मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरें सामने आई थीं।
इसके बाद चुनाव आयोग ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि SIR से जुड़े सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे।
वहीं, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
SIR पर सामूहिक फैसले का सवाल
नई याचिका में चुनाव आयोग की बहु-सदस्यीय व्यवस्था और फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट में अगले हफ्ते इस मामले की सुनवाई होगी।