पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है। चुनावी रैलियों और रोड शो के जरिए सभी प्रमुख दल जनता तक अपनी बात पहुंचाने में जुटे हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय रक्षामंत्री Rajnath Singh ने हुगली में आयोजित रोड शो के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया। राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) राज्य में सत्ता में आता है, तो बंगाल से “गुंडों” का सफाया किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अपराधियों के लिए या तो जेल होगी या “ऊपर” जाने की नौबत आएगी। उनका यह बयान चुनावी माहौल में काफी चर्चा में है।
अपने भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को मजबूत करना होगी। इसके साथ ही उन्होंने किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और राज्य में बेहतर सड़क व इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का वादा किया। राजनाथ सिंह का यह बयान बीजेपी के उस आक्रामक चुनाव अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें पार्टी लगातार सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress (TMC) पर “गुंडाराज” और राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप लगा रही है। बीजेपी का कहना है कि राज्य में अपराध और सियासी हिंसा को रोकना बेहद जरूरी है।
वहीं, केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने भी जमालपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि Mamata Banerjee के शासन में महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है। उन्होंने विभिन्न घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं। अमित शाह ने यह भी दावा किया कि चुनाव के बाद स्थिति बदल जाएगी और कानून-व्यवस्था में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि 4 मई के बाद बंगाल में ऐसा माहौल होगा जहां कोई भी महिला या बच्ची सुरक्षित महसूस कर सकेगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी का राजनीतिक दौर अब समाप्त होने वाला है।
चुनावी कार्यक्रम के अनुसार, पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 मई को संपन्न हो चुका है। अब दूसरे चरण के लिए 29 मई को वोटिंग होनी है। इसके बाद मतगणना की प्रक्रिया पूरी होने पर परिणाम घोषित किए जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और विकास जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं। बीजेपी जहां इन मुद्दों को लेकर टीएमसी पर हमला कर रही है, वहीं टीएमसी अपने विकास कार्यों और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दे को सामने रख रही है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दूसरे चरण के मतदान में मतदाता किस मुद्दे को प्राथमिकता देते हैं और इसका चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ता है।