World Coffee Day: ब्लैक कॉफी पीना जरूरी या दूध वाली भी है ठीक? जानें क्या कहती हैं डाइटिशियन

World Coffee Day: ब्लैक कॉफी पीना जरूरी या दूध वाली भी है ठीक? जानें क्या कहती हैं डाइटिशियन

World Coffee Day के मौके पर कॉफी पीने के तरीकों और सेहत पर उनके असर को लेकर चर्चा की जा सकती है। इन दिनों ब्लैक कॉफी का चलन बढ़ रहा है। सोशल मीडिया पर इसे लिवर को फैटी होने से बचाने से जोड़कर भी देखा जा रहा है। वहीं, कई लोग अब भी दूध मिलाकर कॉफी पीना पसंद करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दूध वाली कॉफी सेहत को नुकसान पहुंचाती है या ब्लैक कॉफी ही बेहतर विकल्प है?

डायटिशियन पायल दत्त, सीनियर डाइटिशियन, कैलाश दीपक हॉस्पिटल के मुताबिक, दूध वाली कॉफी अपने आप में नुकसानदायक नहीं है। कॉफी का असर इस बात पर निर्भर करता है कि उसमें क्या मिलाया जा रहा है, उसे कितनी मात्रा में पिया जा रहा है और आपका शरीर उसे किस तरह सहन करता है।

क्या दूध वाली कॉफी सेहत के लिए नुकसानदायक है?

पायल दत्त के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति दिन में एक या दो कप कॉफी पीता है और उसमें थोड़ी मात्रा में दूध व कम चीनी मिलाता है, तो ज्यादातर स्वस्थ लोगों के लिए यह ठीक है।

दूध मिलाने से कॉफी में प्रोटीन और कैल्शियम भी जुड़ जाता है। इसलिए केवल दूध की मौजूदगी के आधार पर कॉफी को अनहेल्दी कहना सही नहीं है। यानी कॉफी में दूध डालकर पीने वालों को सिर्फ इस वजह से इसे छोड़ने की जरूरत नहीं है।

किन स्थितियों में दूध वाली कॉफी बन सकती है परेशानी की वजह?

कॉफी में जरूरत से ज्यादा चीनी, क्रीम या सिरप मिलाना परेशानी का कारण बन सकता है। इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति दिनभर में कई कप कॉफी पीता है, तो उसकी रोजाना की कैलोरी और चीनी की मात्रा काफी बढ़ सकती है।

कुछ लोगों को दूध पचाने में भी दिक्कत होती है। ऐसे लोगों को दूध वाली कॉफी पीने के बाद गैस, पेट फूलने या पेट में असहजता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए कॉफी में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसे पीने की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।

क्यों बढ़ रहा है ब्लैक कॉफी का ट्रेंड?

ब्लैक कॉफी की लोकप्रियता बढ़ने के पीछे फिटनेस और वजन को लेकर बढ़ती जागरूकता एक बड़ी वजह है। बिना चीनी और क्रीम वाली ब्लैक कॉफी में कैलोरी बहुत कम होती है।

इसमें मौजूद कैफीन कुछ समय के लिए व्यक्ति को ज्यादा सतर्क और एक्टिव महसूस करा सकता है। यही कारण है कि जिम और फिटनेस कल्चर में भी ब्लैक कॉफी को पसंद किया जा रहा है।

हालांकि, सोशल मीडिया पर ब्लैक कॉफी को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच यह समझना जरूरी है कि इसका चलन बढ़ने का मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति के लिए यही सही विकल्प है।

ब्लैक कॉफी ज्यादा पीने से भी हो सकती हैं दिक्कतें

ब्लैक कॉफी को लेकर यह मानना सही नहीं है कि इसे जितनी ज्यादा मात्रा में पिया जाएगा, उतना ही अधिक फायदा होगा। इसमें मौजूद कैफीन की अधिक मात्रा से एसिडिटी, घबराहट, नींद खराब होने या दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

इसलिए केवल कम कैलोरी होने के कारण ब्लैक कॉफी का जरूरत से ज्यादा सेवन करना सही नहीं है। कॉफी की मात्रा और शरीर पर उसके असर को ध्यान में रखना जरूरी है।

ब्लैक कॉफी या दूध वाली कॉफी, क्या चुनें?

ब्लैक कॉफी और दूध वाली कॉफी में से किसी एक को सभी लोगों के लिए बेहतर नहीं कहा जा सकता। कॉफी में कितनी चीनी, दूध, क्रीम या सिरप मिलाया जा रहा है, दिनभर में कितने कप पिए जा रहे हैं और शरीर उसे कैसे सहन करता है—ये सभी बातें मायने रखती हैं।

इसलिए कॉफी चुनते समय केवल उसके नाम या ट्रेंड पर ध्यान देने के बजाय उसकी सामग्री और मात्रा को समझना जरूरी है।