पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का ऑस्ट्रेलिया की संसद में ऐतिहासिक आध्यात्मिक प्रवचन

Authored By: News Corridors Desk | 09 Apr 2026, 04:22 PM
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बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने ऑस्ट्रेलिया की संसद में पहली बार किसी भारतीय संत द्वारा दिया गया आध्यात्मिक प्रवचन पेश किया। उनका यह दौरा 8 से 15 अप्रैल 2026 तक ऑस्ट्रेलिया में चल रहा है। 9 अप्रैल को कैनबरा स्थित संसद भवन से उन्होंने पूरी दुनिया को शांति और प्रेम का संदेश दिया। इस मौके पर उन्होंने मन की शांति को विश्व शांति का आधार बताया और कहा कि जब तक मन में शांति नहीं होगी, तब तक विश्व में स्थायी शांति नहीं आ सकती।

मन में शांति तभी आएगी जब विश्व में शांति होगी

अपने प्रवचन में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि पहली बार ऑस्ट्रेलिया की संसद में सनातन संस्कृति का कार्यक्रम आयोजित हुआ। उन्होंने संसद में उपस्थित लोगों, प्रशासनिक अधिकारियों और दुनिया के 150 करोड़ सनातनियों की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया कि उन्होंने विश्व शांति पर चर्चा के लिए यह अवसर बनाया। उनके अनुसार, शांति केवल बाहरी परिस्थितियों में नहीं बल्कि हमारे अंदर की मानसिक और आध्यात्मिक स्थिरता में रहती है।

भगवान करे मिडिल ईस्ट में सीजफायर बना रहे

बाबा बागेश्वर ने मिडिल ईस्ट की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के दौरान रास्ते में पता चला कि सीजफायर हो गया। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि यह शांति बनी रहे। उन्होंने कहा कि विवादों का हल केवल संवाद के माध्यम से संभव है। उन्होंने स्पष्ट किया, “विनाश करना है तो युद्ध को चुनो और विकास के लिए बुद्ध को चुनो। प्रेम और सहिष्णुता के रास्ते पर चलना ही सबसे बड़ा साधन है।”

आंतरिक शांति का महत्व

पंडित धीरेंद्र ने कहा कि जो व्यक्ति अपने भीतर शांति स्थापित करता है, वही बाहरी अशांति से प्रभावित नहीं होता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि साधु-संत और फकीर अपने जीवन में अत्यंत शांत रहते हैं, जबकि बड़े-बड़े राजा और नौकर-चाकर रखने वाले लोग भी अशांत रहते हैं। उन्होंने इच्छा और अनिच्छा के अंतर को समझाने के लिए कहा कि जब इच्छा पूरी हो जाए तो संतुष्टि मिलती है और संतुष्टि से आंतरिक शांति स्थापित होती है।

भारत की संस्कृति और दृष्टिकोण

उन्होंने भारत की सनातन परंपरा और सभ्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने हमेशा दुनिया को परिवार की दृष्टि से देखा, जबकि अन्य देशों ने केवल व्यापार और भोग की दृष्टि से देखा। उन्होंने स्त्रियों के प्रति दृष्टिकोण का भी जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने महिलाओं को पूज्य दृष्टि से देखा, जबकि अन्य देशों ने केवल भोग्य दृष्टि से देखा।

संवाद ही एकमात्र रास्ता

बाबा बागेश्वर ने ईरान और अमेरिका को शांति का संदेश देते हुए कहा कि महाभारत जैसी बड़ी लड़ाई में भी, अंत में समाधान संवाद और समझदारी से ही आया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विवाद का रास्ता कभी स्थायी शांति नहीं ला सकता। संवाद और प्रेम ही विश्व में स्थायी शांति स्थापित करने का एकमात्र साधन हैं।