यूपी में जमीन की फर्जी रजिस्ट्री पर लगेगी रोक, सरकार ला रही नए नियम

Authored By: News Corridors Desk | 11 Mar 2026, 01:41 PM
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उत्तर प्रदेश में जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर होने वाले विवाद लंबे समय से लोगों के लिए बड़ी परेशानी बने हुए हैं। कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि जिस जमीन का असली मालिक कोई और होता है, उसकी रजिस्ट्री किसी दूसरे के नाम कर दी जाती है। कहीं प्रतिबंधित जमीन बिक जाती है तो कहीं सरकारी या कुर्क की गई जमीन भी रजिस्ट्री के जरिए बेच दी जाती है। ऐसे मामलों में लोगों को सालों तक कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते हैं और उन्हें आर्थिक व मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

सरकार का बड़ा फैसला

इन समस्याओं को देखते हुए अब राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाने से जुड़ा प्रस्ताव मंजूर किया गया है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद फर्जी और विवादित जमीन की रजिस्ट्री पर काफी हद तक रोक लग सकेगी।

रजिस्ट्री से पहले होगी दस्तावेजों की जांच

नई व्यवस्था के तहत अब जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले उससे जुड़े सभी जरूरी दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच की जाएगी। खास तौर पर खतौनी, मालिकाना हक से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य जरूरी कागजों की पड़ताल होगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जो व्यक्ति जमीन बेच रहा है वही उसका असली मालिक हो और उस जमीन पर किसी तरह का विवाद या कानूनी रोक न हो। सरकार का मानना है कि अगर रजिस्ट्री से पहले ही दस्तावेजों की सख्ती से जांच हो जाए तो बाद में होने वाले कई विवादों को रोका जा सकता है।

क्यों जरूरी हुआ यह बदलाव

स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जयसवाल के मुताबिक हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें जमीन का असली मालिक कोई और होता है, लेकिन रजिस्ट्री किसी दूसरे के नाम हो जाती है। कई बार प्रतिबंधित या विवादित जमीन भी बेच दी जाती है। कुछ मामलों में तो सरकारी या कुर्क की गई जमीन का भी पंजीकरण करा लिया जाता है।ऐसे मामलों की जानकारी अक्सर तब मिलती है जब कोई पक्ष अदालत पहुंचता है। तब तक जमीन कई लोगों के हाथों में जा चुकी होती है और मामला और उलझ जाता है।

मौजूदा कानून में थी सीमा

फिलहाल जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 के तहत होती है। इस कानून में उप-निबंधक के पास किसी दस्तावेज की रजिस्ट्री रोकने के अधिकार बहुत सीमित हैं। धारा 35 के तहत वह केवल कुछ खास परिस्थितियों में ही पंजीकरण से इनकार कर सकता है। इसी वजह से कई बार संदिग्ध मामलों में भी रजिस्ट्री हो जाती है और बाद में विवाद खड़ा हो जाता है।

कानून में जुड़ेंगी नई धाराएं

सरकार अब इस कानून में कुछ नई धाराएं जोड़ने जा रही है। इनमें मुख्य रूप से धारा 22-A, 22-B और 35-A शामिल होंगी।

धारा 22-A के तहत कुछ तरह की संपत्तियों की रजिस्ट्री पर रोक लगाई जा सकेगी।

धारा 22-B के तहत रजिस्ट्री से पहले जमीन की सही पहचान और स्थिति की पुष्टि की जाएगी।

धारा 35-A के अनुसार अगर स्वामित्व, कब्जा या अधिकार से जुड़े जरूरी दस्तावेज नहीं होंगे तो रजिस्ट्रेशन अधिकारी रजिस्ट्री करने से इनकार कर सकेगा।

सरकार इन जरूरी दस्तावेजों की सूची राजपत्र के जरिए तय करेगी।

विवादित जमीन की बिक्री रुकेगी

नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रतिबंधित जमीन की बिक्री, सरकारी जमीन की रजिस्ट्री, कुर्क संपत्ति का विक्रय और असली मालिक के अलावा किसी और द्वारा जमीन बेचने जैसे मामलों पर रोक लगने की उम्मीद है। इससे जमीन से जुड़े विवाद कम हो सकते हैं।

आम लोगों को होगा फायदा

सरकार का कहना है कि इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा आम लोगों को मिलेगा। अक्सर लोग अपनी जीवन भर की बचत लगाकर जमीन या मकान खरीदते हैं। बाद में अगर पता चलता है कि जमीन विवादित है, तो उन्हें सालों तक कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते हैं। नई व्यवस्था से ऐसी समस्याओं में कमी आ सकती है।

दूसरे राज्यों में भी हैं ऐसे नियम

अधिकारियों के अनुसार देश के कई राज्यों में पहले से ही ऐसे नियम लागू हैं, जहां संदिग्ध या विवादित जमीन की रजिस्ट्री रोकने का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश में भी अब इसी दिशा में कदम उठाया गया है ताकि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ सके।