पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, जबकि पहली बार राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है। शुक्रवार को हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना गया। इसके साथ ही तय हो गया कि वह शनिवार को ब्रिगेड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। शुभेंदु अधिकारी बंगाल में मुख्यमंत्री बनने वाले बीजेपी के पहले नेता होंगे।
राजनीतिक परिवार से आने वाले शुभेंदु अधिकारी ने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। बाद में वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और फिर बीजेपी का हिस्सा बने। समय के साथ वह बंगाल में बीजेपी के प्रमुख चेहरों में गिने जाने लगे। उन्होंने न केवल पार्टी संगठन को मजबूत किया, बल्कि खुद को ममता बनर्जी के मजबूत विरोधी नेता के रूप में भी स्थापित किया। उन्होंने पहले नंदीग्राम में और फिर इस चुनाव में भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को हराया। शुभेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के करकुली गांव में महिष्य क्षत्रिय परिवार में हुआ था। उनके पिता शिशिर अधिकारी विधानसभा और लोकसभा दोनों के सदस्य रह चुके हैं। उनके भाई सौमेंदु अधिकारी कांथी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चेयरमैन रहे और अब 18वीं लोकसभा में कांथी सीट से सांसद हैं। वहीं दिव्येंदु अधिकारी भी उनके भाई हैं, जो 2019 में तमलुक सीट से लोकसभा पहुंचे थे। शुभेंदु अधिकारी ने 2011 में रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री प्राप्त की। वह अविवाहित हैं।
उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1995 में कांथी म्युनिसिपैलिटी में कांग्रेस पार्षद के रूप में की थी। 2006 में वह कांथी दक्षिण सीट से विधायक चुने गए और उसी वर्ष कांथी म्युनिसिपैलिटी के चेयरमैन भी बने। साल 2007 में नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान शुभेंदु अधिकारी चर्चा में आए। ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में उन्होंने भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी का नेतृत्व किया। नंदीग्राम आंदोलन में सफलता के बाद उन्हें जंगलमहल क्षेत्र—पश्चिम मेदिनीपुर, पुरुलिया और बांकुड़ा का पार्टी प्रभारी बनाया गया, जहां उन्होंने संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
2009 में वह तमलुक लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। उन्होंने सीपीआई (एम) के उम्मीदवार लक्ष्मण सेठ को करीब 1.73 लाख वोटों से हराया। इसके बाद 2016 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट से जीत दर्ज की और लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। 27 मई 2016 को वह ममता बनर्जी सरकार में परिवहन मंत्री बने। साल 2020 में शुभेंदु अधिकारी ने पहले हुगली रिवर ब्रिज कमीशन के चेयरमैन पद और फिर परिवहन मंत्री पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से दूरी बना ली। 19 दिसंबर 2020 को वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। उस समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा रही कि उनका पार्टी छोड़ना अभिषेक बनर्जी के साथ बढ़ते मतभेदों की वजह से हुआ।
2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को 1,956 वोटों से हराया और इसके बाद वह बंगाल विधानसभा में बीजेपी विधायक दल के नेता बने। 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम के साथ-साथ भवानीपुर सीट से भी चुनाव लड़ा और दोनों सीटों पर बड़ी जीत दर्ज की। अब विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद वह शनिवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं।