Pakistan grapples with energy crisis : पाकिस्तान में आज रात से लगेगा लॉकडाउन

Authored By: News Corridors Desk | 07 Apr 2026, 05:44 PM
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पाकिस्तान इस समय गंभीर ऊर्जा संकट से गुजर रहा है। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में एक अहम बैठक हुई, जिसमें देशभर में ऊर्जा बचाने के लिए सख्त फैसले लिए गए। सरकार ने तय किया कि 7 अप्रैल से अधिकांश शहरों में बाजार, शॉपिंग मॉल और दुकानें रात 8 बजे तक बंद करनी होंगी। यह कदम बिजली और ईंधन की खपत को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का मानना है कि अगर व्यापारिक गतिविधियों का समय सीमित किया जाए, तो ऊर्जा की मांग में कमी आएगी और देश के संसाधनों पर दबाव कम होगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है और ऊर्जा आयात पर उसकी निर्भरता काफी अधिक है।

 

किन क्षेत्रों में लागू होंगे नए नियम

सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार यह नियम पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान, इस्लामाबाद, गिलगित-बाल्टिस्तान और आजाद जम्मू-कश्मीर में लागू किया जाएगा। इन सभी क्षेत्रों में बाजार, मॉल, डिपार्टमेंटल स्टोर और रोजमर्रा की दुकानों को रात 8 बजे तक बंद करना अनिवार्य होगा। हालांकि खैबर पख्तूनख्वा के कुछ प्रमुख शहरों को थोड़ी राहत दी गई है, जहां बाजार रात 9 बजे तक खुले रह सकते हैं। इससे स्थानीय व्यापारियों को कुछ हद तक सहूलियत मिलेगी। इससे पहले भी खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की प्रांतीय सरकारें ऊर्जा बचाने के लिए इसी तरह के कदम उठा चुकी हैं।

होटल, रेस्टोरेंट और शादियों पर भी असर

सरकार के इस फैसले का असर सिर्फ दुकानों तक सीमित नहीं है। बेकरी, रेस्टोरेंट, तंदूर, फूड आउटलेट और मैरिज हॉल को रात 10 बजे तक बंद करना होगा। इसके अलावा घरों में होने वाले शादी समारोहों को भी इसी समय सीमा के भीतर खत्म करना जरूरी होगा। हालांकि जरूरी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए मेडिकल स्टोर और फार्मेसी को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य सेवाओं पर किसी भी तरह का असर नहीं पड़ने दिया जाएगा।

जनता को राहत देने के प्रयास

सख्ती के साथ-साथ सरकार ने कुछ राहत देने की भी कोशिश की है। गिलगित और मुजफ्फराबाद में एक महीने के लिए मुफ्त इंटरसिटी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवा देने की घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य लोगों के यात्रा खर्च को कम करना और ईंधन की खपत को नियंत्रित करना है। इसके अलावा सरकार चार दिन के कार्य सप्ताह का प्रस्ताव, ईंधन भत्तों में कटौती और सरकारी खर्च में 20 प्रतिशत कमी जैसे कदमों पर भी विचार कर रही है। ये सभी उपाय देश की आर्थिक स्थिति को स्थिर करने और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए किए जा रहे हैं।

मिडिल ईस्ट तनाव बना बड़ी वजह

इस संकट की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। इसके जवाब में ईरान ने भी कार्रवाई की, जिससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। इसका सीधा असर Strait of Hormuz पर पड़ा, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक तेल सप्लाई में बाधा आई और कीमतें तेजी से बढ़ गईं।

ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी

ऊर्जा संकट के चलते पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। 6 मार्च को सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 55 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। इसके बाद 2 अप्रैल को पेट्रोल की कीमत 458.41 रुपए प्रति लीटर और डीजल 520.35 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में सरकार ने कुछ राहत देते हुए पेट्रोल की कीमत घटाकर करीब 378 रुपए प्रति लीटर कर दी। इसके बावजूद ईंधन की कीमतें अभी भी आम जनता के लिए काफी ज्यादा हैं, जिससे महंगाई और बढ़ गई है।

आर्थिक स्थिति सुधारने की कोशिश

पाकिस्तान की सरकार इस संकट के आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए कई बड़े कदम उठा रही है। ऊर्जा बचाने के उपायों के साथ-साथ सरकारी खर्च में कटौती, ईंधन सब्सिडी में बदलाव और प्रशासनिक सुधार जैसे कदम भी शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इन उपायों के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर किया जाए और भविष्य में ऐसे संकटों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके। हालांकि इन फैसलों का असर आम लोगों और व्यापारियों पर पड़ना तय है, जिससे कुछ असंतोष भी देखने को मिल सकता है।

निष्कर्ष-

ऊर्जा संकट ने Pakistan को कड़े फैसले लेने के लिए मजबूर कर दिया है। बाजारों को जल्दी बंद करने का निर्णय भले ही जरूरी हो, लेकिन इसका असर आम लोगों की जिंदगी और कारोबार पर पड़ेगा। यह स्थिति यह भी दिखाती है कि वैश्विक घटनाओं खासकर मिडिल ईस्ट के तनाव का असर सीधे आम देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि सरकार के ये कदम कितने प्रभावी साबित होते हैं और क्या इससे देश को ऊर्जा संकट से राहत मिल पाती है।