हिमाचल के सिरमौर में अनोखी शादी का नया अध्याय, एक पत्नी और दो भाइयों के घर जन्मा बच्चा

Authored By: News Corridors Desk | 17 Apr 2026, 01:53 PM
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हिमाचल प्रदेश के शांत पहाड़ों से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है। एक तरफ जहां आधुनिक समाज तेजी से बदल रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ परंपराएं आज भी जिंदा हैं और जब वे सामने आती हैं, तो चर्चा छिड़ना तय होता है। सिरमौर जिला के गिरीपार इलाके से आई यह खबर भी कुछ ऐसी ही है, जो परंपरा, समाज और सोच—तीनों को एक साथ जोड़ती है।

यहां रहने वाले हाटी समुदाय के एक परिवार में हाल ही में एक बच्चे का जन्म हुआ है। पहली नजर में यह एक सामान्य खुशखबरी लग सकती है, लेकिन इसके पीछे की कहानी इसे बेहद खास बना देती है। दरअसल, इस बच्चे की मां का विवाह एक नहीं, बल्कि दो सगे भाइयों से हुआ है।

यह अनोखा विवाह जुलाई 2025 में हुआ था और उस समय इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए थे। लोगों ने इसे हैरानी, जिज्ञासा और बहस—तीनों नजरियों से देखा था। यह शादी किसी व्यक्तिगत फैसला भर नहीं थी, बल्कि एक पुरानी परंपरा का हिस्सा थी, जिसे पॉलीएंड्री कहा जाता है। स्थानीय भाषा में इसे “जोड़ीदार प्रथा” के नाम से जाना जाता है।

इस प्रथा में एक महिला का विवाह एक से अधिक पुरुषों से होता है, और अक्सर ये पुरुष आपस में सगे भाई होते हैं। सुनने में यह बात भले ही अलग लगे, लेकिन गिरीपार के कुछ इलाकों में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। हालांकि, अब यह बहुत कम देखने को मिलती है और धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है।

करीब 10 महीने बाद जब इस परिवार में बच्चे का जन्म हुआ, तो घर में खुशी का माहौल बन गया। परिवार के लोगों ने इस खुशी को खुलकर मनाया और आसपास के लोगों ने भी शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया पर भी इस खबर को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं कुछ ने इसे परंपरा का सम्मान बताया, तो कुछ ने इसे आज के दौर में अजीब माना।

हालांकि, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इस पूरे मामले से जुड़ी जानकारी मुख्य रूप से परिवार और स्थानीय रिपोर्ट्स पर आधारित है। आधिकारिक स्तर पर ज्यादा पुष्टि सामने नहीं आई है।

अगर इस परंपरा की वजह को समझें, तो इसके पीछे कुछ व्यावहारिक कारण बताए जाते हैं। पहाड़ी इलाकों में जमीन सीमित होती है, और उसे बार-बार बांटने से खेती और जीवन दोनों मुश्किल हो सकते हैं। ऐसे में एक ही परिवार में भाइयों का एक ही महिला से विवाह करने से जमीन का बंटवारा नहीं होता और परिवार भी एकजुट रहता है। इसके अलावा आर्थिक स्थिरता बनाए रखने का भी यह एक तरीका माना जाता रहा है।

लेकिन आज के समय में जब शिक्षा, कानून और समाज की सोच तेजी से बदल रही है, तो ऐसी परंपराओं पर सवाल उठना भी स्वाभाविक है। नई पीढ़ी इन प्रथाओं को अलग नजरिए से देख रही है। कुछ लोग इसे सांस्कृतिक पहचान मानते हैं, जिसे बचाए रखना चाहिए, जबकि कुछ का मानना है कि बदलते समय के साथ समाज को भी बदलना जरूरी है।

फिलहाल, इस परिवार के लिए यह पल खुशियों से भरा है। एक नए जीवन के आगमन ने उनके घर में उत्सव का माहौल ला दिया है। लेकिन इसके साथ ही यह घटना एक बड़ी बहस को भी जन्म दे रही है क्या परंपराएं वैसे ही जारी रहनी चाहिए, या उन्हें समय के साथ बदलना चाहिए?