मायावती का कांग्रेस और सपा पर तीखा हमला, आरक्षण और महिला मुद्दे पर उठाए सवाल

Authored By: News Corridors Desk | 17 Apr 2026, 03:11 PM
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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने एक बार फिर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दोनों पार्टियों पर दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ये दल केवल चुनावी राजनीति के तहत बड़े-बड़े वादे करते हैं, जबकि सत्ता में रहते हुए इनका रवैया पूरी तरह अलग होता है।
मायावती ने खास तौर पर महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर कांग्रेस को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज भले ही महिला सशक्तिकरण और आरक्षण की बड़ी-बड़ी बातें कर रही हो, लेकिन जब वह केंद्र की सत्ता में थी, तब उसने अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को पूरी तरह लागू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उनके मुताबिक, कांग्रेस का वर्तमान रुख केवल दिखावा है और इसका उद्देश्य सिर्फ वोट बैंक को साधना है।


उन्होंने कांग्रेस को “गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली पार्टी” बताते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि इस पार्टी ने हमेशा संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के साथ समझौता किया है। मायावती ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकारों के दौरान आरक्षित पदों को भरने में गंभीरता नहीं दिखाई गई, जिससे वंचित वर्गों को उनका पूरा हक नहीं मिल पाया। सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, मायावती ने समाजवादी पार्टी पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक पुराना उदाहरण देते हुए कहा कि 1994 में पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी श्रेणी में लाभ देने की एक अहम रिपोर्ट आई थी। उस समय सपा की सरकार थी, लेकिन उसने इस रिपोर्ट को लागू करने के बजाय ठंडे बस्ते में डाल दिया।


मायावती ने आगे कहा कि जब 1995 में बसपा की सरकार बनी, तो इस फैसले को तुरंत लागू किया गया। उन्होंने सपा पर आरोप लगाया कि वह विपक्ष में रहते हुए सामाजिक न्याय की बात करती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद अपने वादों से पीछे हट जाती है। बसपा प्रमुख ने जनता को आगाह करते हुए कहा कि कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियां दोहरे चरित्र की राजनीति करती हैं। उन्होंने कहा कि ये दल चुनाव के समय खुद को वंचित वर्गों का हितैषी बताने की कोशिश करते हैं, लेकिन असल में उनका मकसद केवल सत्ता हासिल करना होता है।


मायावती ने लोगों से अपील की कि वे ऐसी पार्टियों से सावधान रहें और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें। उन्होंने कहा कि दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों के वास्तविक विकास के लिए ईमानदार नीतियों और ठोस कार्यों की जरूरत है, न कि केवल चुनावी वादों की।