नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों द्वारा वेतन वृद्धि और अन्य मांगों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन ने उस समय हिंसक रूप ले लिया, जब इसमें कथित तौर पर बाहरी तत्वों की एंट्री हुई। अब इस पूरे मामले में UP Police और केंद्रीय एजेंसियों ने जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि यह हिंसा एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकती है। जांच के मुताबिक, अब तक गिरफ्तार किए गए 60 से अधिक लोगों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो वास्तविक फैक्ट्री मजदूर नहीं हैं। पुलिस के अनुसार, कुल 66 गिरफ्तार लोगों में से लगभग 45 बाहरी तत्व हैं, जो आंदोलन की आड़ में शामिल हुए और माहौल को हिंसक बनाने में भूमिका निभाई। अधिकारियों का मानना है कि इन लोगों का उद्देश्य मजदूरों के शांतिपूर्ण विरोध को भटकाना और अराजकता फैलाना था।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि प्रदर्शन को एक संगठित और प्रशिक्षित समूह द्वारा प्रभावित किया जा रहा था। इस समूह को “मिलिशिया” की तरह काम करने वाला बताया जा रहा है, जो मजदूरों के बीच घुलमिल कर हिंसा भड़काने का काम कर रहा था। हिंसा के दौरान पेट्रोल का इस्तेमाल कर आगजनी की घटनाएं सामने आईं, जिससे यह आशंका और मजबूत होती है कि पूरी घटना पहले से योजना बनाकर की गई थी। डिजिटल स्तर पर भी इस साजिश के संकेत मिले हैं। अफवाहें फैलाने और लोगों को उकसाने के लिए फर्जी WhatsApp ग्रुप बनाए गए थे। जांच एजेंसियों ने पाया कि कुछ सोशल मीडिया हैंडल Pakistan से संचालित हो रहे थे, जो भ्रामक सूचनाएं फैलाकर स्थिति को और बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और विदेशी कनेक्शन की गहन जांच जारी है।
इसके अलावा शुरुआती जांच में कुछ वामपंथी (अल्ट्रा-लेफ्ट) तत्वों की भूमिका की भी आशंका जताई गई है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने मजदूरों के आंदोलन को हाईजैक कर उसे हिंसक दिशा देने की कोशिश की। हालांकि इस पहलू की पुष्टि के लिए जांच अभी जारी है। इस पूरे घटनाक्रम पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केवल मजदूरों के वेतन का मुद्दा नहीं है, बल्कि राज्य के औद्योगिक माहौल को खराब करने की एक साजिश भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां निवेश और उद्योगों के लिए नुकसानदायक हैं। पुलिस ने इस मामले में 13 से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं और कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है। नोएडा की पुलिस कमिश्नर Laxmi Singh ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रशासन के मुताबिक ये घटना केवल श्रमिक असंतोष तक सीमित नहीं थी, बल्कि नोएडा के आर्थिक तंत्र को बाधित करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा थी, जिसमें कुछ राजनीतिक तत्वों और संगठित समूहों की संलिप्तता रही. सरकार के अनुसार, विभिन्न राज्यों की कुछ महिलाएं भी विरोध प्रदर्शन में सक्रिय रूप से शामिल पाई गईं और हिंसक गतिविधियों में लगे लोगों की मदद कर रही थीं.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन ने हालात काबू में करने के लिए तत्काल कदम उठाए. जिसमें वेतन वृद्धि की घोषणा के बाद मजदूरों और फैक्टरी मालिकों, दोनों ने सहयोग किया. जिससे नोएडा में औद्योगिक गतिविधियां जल्द ही पटरी पर लौट आईं. सरकार ने कहा, कारखानों में सामान्य रूप से कामकाज जारी है और श्रमिक तथा उद्योग जगत के हितधारक सहयोग कर रहे हैं.