Strait of Hormuz: दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि यह मार्ग पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन ईरान ने इसके इस्तेमाल को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका गहरा गई है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 25 मार्च को स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से बंद नहीं है। उन्होंने कहा कि यह रास्ता उन देशों के लिए खुला है जिन्हें ईरान ‘मित्र देश’ मानता है। इनमें भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं। इन देशों के जहाज सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए इस मार्ग से गुजर सकते हैं। हालांकि, ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि जिन देशों को वह अपना विरोधी मानता है या जो उसके दुश्मनों के सहयोगी हैं, उनके लिए यह मार्ग बंद रहेगा। इसका सीधा असर वैश्विक शिपिंग और तेल-गैस सप्लाई चेन पर पड़ सकता है, क्योंकि यह जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण तेल, गैस और खाद की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ रहा है, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं। गुटेरेस ने यह भी चेतावनी दी कि यह समय कृषि सीजन के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। अगर सप्लाई में देरी होती है, तो इसका असर खाद्य उत्पादन और कीमतों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और युद्ध को जल्द समाप्त करने की अपील की।
महासचिव ने अमेरिका और इजरायल को भी स्पष्ट संदेश दिया कि अब संघर्ष को खत्म करने का समय आ गया है। साथ ही उन्होंने ईरान से यह भी कहा कि वह उन पड़ोसी देशों पर हमले बंद करे जो इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं। इस बीच, ईरान ने अमेरिका समर्थित 15-पॉइंट शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि किसी भी समझौते के लिए उसकी शर्तों को मानना जरूरी होगा। यह रुख संकेत देता है कि निकट भविष्य में तनाव कम होने की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है।
वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के नेताओं के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, क्योंकि उसे आंतरिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इस बयान पर ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थिति को और जटिल बनाते हुए, ईरान के डिफेंस काउंसिल ने नए नियम जारी किए हैं। अब किसी भी ‘गैर-विरोधी’ देश के जहाज को भी होर्मुज से गुजरने के लिए पहले ईरानी अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी। न्यूयॉर्क में स्थित ईरानी मिशन ने भी पुष्टि की है कि केवल वे ही जहाज सुरक्षित रूप से गुजर पाएंगे, जो ईरान के सुरक्षा निर्देशों का पालन करेंगे और पूर्व अनुमति प्राप्त करेंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर मौजूदा हालात वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चिंता बनते जा रहे हैं। अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका असर न केवल तेल और गैस की कीमतों पर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।