महिला आरक्षण बिल मायावती ने कर दिया बड़ा ऐलान, कांग्रेस पर चुन-चुन कर निशाने साधे

Authored By: News Corridors Desk | 15 Apr 2026, 01:40 PM
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बसपा प्रमुख मायावती ने महिला आरक्षण का किया समर्थन, लेकिन रखी अहम शर्त। कांग्रेस पर लगाया आरोप SC, ST और OBC महिलाओं के मुद्दे को पहले नजरअंदाज किया।

महिला आरक्षण बिल पर मायावती का स्पष्ट रुख

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख Mayawati ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते हुए कहा कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में जरूरी कदम है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर इसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए  अलग कोटा नहीं होगा, तो इसका असली उद्देश्य काफी हद तक प्रभावित हो सकता है।

‘सबको समान लाभ नहीं मिलेगा’ उठाई अहम चिंता, सब-क्वोटा की मांग क्यों?

मायावती ने कहा कि महिला आरक्षण का लाभ तभी वास्तविक रूप से सभी वर्गों तक पहुंचेगा,  जब इसमें पिछड़े और वंचित समुदायों की महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था की जाएगी।
उनका मानना है कि बिना इस प्रावधान के, समाज के प्रभावशाली वर्ग ही ज्यादा फायदा उठा सकते हैं,  जिससे आरक्षण का मूल उद्देश्य कमजोर पड़ जाएगा।

कांग्रेस पर निशाना ‘अब क्यों याद आया मुद्दा?’ पुराने फैसलों पर उठाए सवाल

मायावती ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि जब पार्टी सत्ता में थी, तब उसने SC, ST और OBC महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब इस मुद्दे को उठाना कांग्रेस की राजनीतिक सोच को दर्शाता है, जो पहले इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठा सकी। बसपा प्रमुख ने कहा कि महिला आरक्षण को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर के रूप में लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और भेदभाव अब भी जारी हैं, ऐसे में यह जरूरी है कि इस बिल को सही भावना और प्रभावी नीतियों के साथ लागू किया जाए।

आरक्षण को जल्द लागू करने की मांग

मायावती ने सरकार से अपील की कि महिला आरक्षण को बिना किसी बाधा के जल्द लागू किया जाए, ताकि इससे समाज में सकारात्मक बदलाव आ सके। साथ ही उन्होंने लोगों से भी मानसिकता बदलने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि महिलाओं को वास्तविक रूप से बराबरी का स्थान मिल सके। महिला आरक्षण बिल को लेकर मायावती का रुख साफ है वह इसके पक्ष में हैं, लेकिन सामाजिक न्याय के संतुलन के साथ। उनके बयान ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या आरक्षण का लाभ सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचेगा या नहीं।