अब गोबरी-बावरी नहीं, अखंड-आरव होंगे नाम…राजस्थान सरकार बदलेगी हजारों बच्चों के अजीब नाम

Authored By: News Corridors Desk | 15 Apr 2026, 02:50 PM
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स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज असामान्य और मजाकिया नामों को सुधारने की तैयारी में सरकार। बच्चों के आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला।

बच्चों के नाम बदलने की तैयारी, सरकार का बड़ा कदम

Rajasthan सरकार ने एक अनोखा लेकिन अहम फैसला लेते हुए स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के असामान्य और अटपटे नामों को बदलने की प्रक्रिया शुरू करने की योजना बनाई है। इस पहल के तहत हजारों ऐसे नामों की पहचान की गई है, जिन्हें बदलने की जरूरत महसूस की गई है  ताकि बच्चों को भविष्य में किसी तरह की शर्मिंदगी या मानसिक दबाव का सामना न करना पड़े।

बच्चों के नाम क्यों बदल रही है राजस्थान सरकार ? 

सरकारी रिकॉर्ड और स्कूल डेटा में ऐसे कई नाम सामने आए हैं, जो या तो मजाकिया हैं या सामाजिक रूप से असहज महसूस कराते हैं। ऐसे नामों की वजह से बच्चों को स्कूल और समाज में कई बार उपहास का सामना करना पड़ता है, जिससे उनके आत्मविश्वास पर असर पड़ता है। सरकार का मानना है कि एक उचित और सम्मानजनक नाम बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी कारण यह कदम उठाया जा रहा है ताकि बच्चों को एक सकारात्मक पहचान मिल सके और वे बिना झिझक के आगे बढ़ सकें।

हजारों नामों की लिस्ट तैयार, प्रक्रिया होगी व्यवस्थित

राज्य सरकार ने ऐसे नामों की एक विस्तृत सूची तैयार की है, जिन्हें बदला जा सकता है। इस प्रक्रिया को पूरी तरह व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाएगा, जिसमें अभिभावकों की सहमति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बिना सहमति के किसी भी नाम को बदला नहीं जाएगा। इस योजना को लागू करने में शिक्षा विभाग की अहम भूमिका होगी। स्कूल प्रशासन बच्चों के नामों की पहचान कर सूची तैयार करेगा और फिर उसे आगे की प्रक्रिया के लिए भेजेगा। इसके बाद आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताओं को पूरा कर नाम परिवर्तन किया जाएगा।

सामाजिक सोच में बदलाव की भी जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाने का भी एक प्रयास है। अभिभावकों को यह समझाने की जरूरत है कि बच्चों के नाम सोच-समझकर रखें, ताकि उन्हें भविष्य में किसी तरह की परेशानी न हो। राजस्थान सरकार का यह कदम बच्चों के आत्मसम्मान और बेहतर भविष्य की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। अगर यह योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो इससे न सिर्फ बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि समाज में भी नाम रखने को लेकर जागरूकता आएगी।