माँ गोमती के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर चलाए जा रहे अभियान “गोमती दर्शन यात्रा” के तहत हाल ही में एक व्यापक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रशासन और आम जनता की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, बल्कि नदी पुनर्जीवन के लिए सामूहिक जिम्मेदारी को भी रेखांकित करती है।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, विधायक बाबूलाल पासवान, ब्लॉक प्रमुख अजय गंगवार और महामंडलेश्वर स्वामी शिवानंद जी महाराज की उपस्थिति ने इसे विशेष महत्व प्रदान किया। सभी अतिथियों ने माँ गोमती के संरक्षण, स्वच्छता और पुनर्जीवन के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
वृक्षारोपण से दिया गया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने नीम का पौधा लगाकर वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की। इसके साथ ही हरिशंकरी वृक्ष—पीपल, बरगद और पाकड़—का रोपण भी किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि नदियों के किनारे अधिक से अधिक वृक्षारोपण आवश्यक है, जिससे जलधारा की निरंतरता बनी रहे और पर्यावरण संतुलन मजबूत हो सके।
वन मंत्री ने गोमती पुनर्जीवन पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई
वन मंत्री डॉ. सक्सेना ने स्पष्ट किया कि सरकार माँ गोमती के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि नदी में जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने वेटलैंड्स के संरक्षण को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा कि गोमती उत्तर प्रदेश की जीवनरेखा है और इसके संरक्षण में जनसहभागिता अत्यंत जरूरी है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि नदी तटों पर प्लास्टिक का उपयोग बंद करें और पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाएं।
माधव टांडा में वन सफारी विकसित करने की घोषणा
कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए वन मंत्री ने पीलीभीत के माधव टांडा वन क्षेत्र को वन्य सफारी के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द योजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
गोमती संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
कार्यक्रम में गोमती दर्शन संस्था द्वारा मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन प्रशासन के माध्यम से सौंपा गया।
इसमें कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल थे, जैसे:
झीलों, तालाबों और वेटलैंड्स की मनरेगा के तहत सफाई
सहायक नदियों का संरक्षण
नालों के जल का वैज्ञानिक ट्रीटमेंट
गोमती को राज्य नदी का दर्जा देने की मांग
इन मांगों का उद्देश्य नदी के दीर्घकालिक संरक्षण और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को सुनिश्चित करना है।
संस्था की सक्रिय भूमिका और जनसहभागिता
इस कार्यक्रम में गोमती दर्शन संस्था के संयोजक एडवोकेट अनुराग पांडे और अध्यक्ष श्वेता सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ संस्था के कई पदाधिकारी और स्थानीय गणमान्य नागरिक भी शामिल हुए, जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा महामना मालवीय मिशन द्वारा भी एक ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जिसमें “पंचवटी” मॉडल के तहत सड़कों और नदी किनारों पर वृक्षारोपण का प्रस्ताव रखा गया।
नदी संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी
गोमती दर्शन यात्रा का यह आयोजन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नदी संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही संभव है। सरकार और समाज के संयुक्त प्रयास से ही माँ गोमती जैसी जीवनदायिनी नदियों का पुनर्जीवन संभव है। यह पहल आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मजबूत उदाहरण बन सकती है।